आदर्श कृष्णिका
आदर्श कृष्णिका :- ऐसी वस्तु पृष्ठ जो कम ताप पर आपतित सभी तरंगदैध्र्य के ऊष्मीय विकिरण को अवशोषित कर लेती है तथा उच्च ताप पर उन सभी तरंगदैध्र्य के ऊष्मीय विकिरण को उत्सर्जित कर देती है। उसे आदर्श कृष्णिका पृष्ठ माना जाता है।
आदर्श कृष्णिका की विशेषताएँ
(1). अवशोषण गुणांक (a) और परावर्तक गुणांक (r) :
आदर्श कृष्णिका का अवशोषण गुणांक (a) 1 है, अर्थात् यह अपने ऊपर आपतित सभी विकिरणों को 100% अवशोषित कर लेती है। इसका परावर्तक गुणांक (r) और पारगमन गुणांक (t) शून्य होते है, जिससे यह न कोई विकिरण परावर्तित करती है और न ही पारित होने देती है। इसकी उत्सर्जकता (emissivity) (e) भी 1 होती है, अर्थात् यह अधिकतम दक्षता के साथ विकिरण उत्सर्जित करता है।
(2). तापमान पर निर्भरता :
आदर्श कृष्णिका के प्रष्ठ से उत्सर्जित विकिरण की प्रकृति केवल उसके तापमान पर निर्भर करती है। इस प्रकार के विकिरण को पूर्ण विकिरण (full radiation) अथवा श्वेत विकिरण (white radiation) भी कहा जाता है क्योंकि इसमें सभी तरंगदैर्ध्य की किरणें सम्मिलित होती हैं।
(3). स्पैक्ट्रमी ऊर्जा वितरण वक्र :
प्रत्येक ताप पर आदर्श कृष्णिका का स्पैक्ट्रमी ऊर्जा वितरण वक्र (spectral energy distribution curve) सदैव सतत प्राप्त वक्र प्राप्त होता है। इसी आधार पर यदि किसी ऊष्मा स्रोत का विकिरण स्पेक्ट्रम सतत हो, तो उसे आदर्श कृष्णिका के समान माना जा सकता है। ऐसे स्रोतों के उदाहरण हैं — मिट्टी के तेल का लैंप (kerosene lamps), तेल का दीपक, तप्त तंतु (heating filaments) आदि।
(4). अवशोषण और उत्सर्जन का व्यवहार :
निम्न ताप पर आदर्श कृष्णिका का प्रष्ठ एक उत्कृष्ट अवशोषक होता है, और उच्च ताप पर यह एक प्रभावी उत्सर्जक बन जाता है।
(5). रंग के बारे में भ्रम :
नाम से प्रतीत होने के विपरीत, आदर्श कृष्णिका का रंग वास्तव में काला होना आवश्यक नहीं है। उदाहरण के लिए, सूर्य आदर्श काले पिंड की भांति व्यवहार करता है, जबकि वह चमकदार दिखाई देता है।
(6). प्रयोगात्मक मॉडल :
फेरी की आदर्श कृष्णिका (Ferry’s Ideal Black Body) : फेरी की कृष्णिका एक प्रयोगात्मक मॉडल है जो एक आदर्श कृष्णिका की भांति व्यवहार करती है। इसमें एक खोखला पात्र होता है जिसकी दीवार में एक छोटा छिद्र (aperture) होता है। जब विकिरण इस छिद्र से भीतर प्रवेश करती है, तो वह कृष्णिका के भीतर अनेक बार परावर्तित होती है और बहुत ही कम मात्रा में बाहर निकल पाती है, जिससे कृष्णिका लगभग सभी विकिरणों को अवशोषित कर लेती है।
- पात्र के भीतरी प्रष्ठ पर अत्यधिक अवशोषणशील पदार्थ (जैसे कि लैंप ब्लैक) का लेपन किया जाता है।
- छोटा छिद्र एक आदर्श अवशोषक के रूप में कार्य करता है क्योंकि भीतर गई विकिरणों के पुनः बाहर निकलने की संभावना नगण्य होती है।
- यह मॉडल प्रयोगशालाओं में एक आदर्श कृष्णिका का अच्छा सन्निकटन (approximation) प्रदान करता है।

