प्रीवोस्ट का सिद्धांत | प्रीवोस्ट का ऊष्मा विनिमय का सिद्धांत
प्रीवोस्ट का सिद्धांत | प्रीवोस्ट का ऊष्मा विनिमय का सिद्धांत :- प्रीवोस्ट का ऊष्मा विनिमय का सिद्धांत एक महत्वपूर्ण ऊष्मागतिकीय सिद्धांत है, जिसे 1791 में स्विट्ज़रलैंड के वैज्ञानिक पीटर प्रीवोस्ट ने प्रस्तुत किया था। इस सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक वस्तु अपने परिवेश के साथ प्रत्येक ताप पर (परम शून्य ताप अर्थात् 0 केल्विन के अतिरिक्त) ऊष्मा ऊर्जा का विनिमय (आदान-प्रदान) विकिरण विधि से करती रहती है। ये विनिमय अनन्त समय तक चलता रहता है। किसी वस्तु का अपने वातावरण के साथ तापान्तर का सम्बन्ध निर्धारित करता है, कि वस्तु को शीतलन प्रभाव महसूस होगा अथवा ऊष्मन प्रभाव।
मुख्य बिंदु :
(1). सभी वस्तुएँ ऊष्मा का विकिरण करती हैं :
प्रत्येक वस्तु, चाहे उसका तापमान कुछ भी हो, अपने वातावरण में लगातार ऊष्मा का विकिरण करती है। यह क्रिया सभी तापमानों पर होती है (परम शून्य ताप के अतिरिक्त)।
(2). ऊष्मा का आदान-प्रदान :
यह सिद्धांत अन्य वस्तुओं की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होता। अर्थात् प्रत्येक वस्तु स्वतंत्र रूप से ऊष्मा का विकिरण करती है, चाहे उसके निकट अन्य वस्तुएँ हों या न हों।
नोट :
