वीन का विस्थापन नियम
वीन का विस्थापन नियम :- 1893 में जर्मन भौतिक विज्ञानी विल्हेम विएन (Wilhelm Wien) ने यह महत्त्वपूर्ण नियम की खोज की, जो कृष्णिका प्रष्ठ के तापमान और अधिकतम उत्सर्जन क्षमता के संगत तरंगदैध्य के मध्य संबंध स्थापित करता है। इसे वीन का विस्थापन नियम कहा जाता है।
कथन – वीन का विस्थापन नियम :
किसी कृष्णिका के लिए अधिकतम उत्सर्जन क्षमता के संगत तरंगदैध्य का मान उसके परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
गणितीय रूप से,
अथवा
जहाँ :
- λm = अधिकतम उत्सर्जन क्षमता के संगत तरंगदैध्य
- = कृष्णिका का तापमान (केल्विन में)
- = वीन नियतांक = 2.898 × 10−3 m-K
- b की विमा = [M0LT0 θ]
आवृत्ति और तापमान के पदों में वीन का विस्थापन नियम
व्याख्या
- वीन का विस्थापन नियम तापमान और विकिरण की तरंगदैर्घ्य (वर्ण) के मध्य एक मूलभूत संबंध स्थापित करता है। यही कारण है कि गरम वस्तुएँ तापमान बढ़ने पर अपना रंग परिवर्तित करती हैं – जैसे पहले लाल, फिर पीली और अंत में सफेद चमकदार।
- जैसे-जैसे कृष्णिका का तापमान बढ़ता है, उत्सर्जन वक्र का शिखर (peak) अल्प तरंगदैर्घ्यों की ओर विस्थापित होता है।
- इसका अर्थ है कि उच्च तापमान वाले पिंड कम तरंगदैर्घ्य (नीला/बैंगनी) की विकिरण उत्सर्जित करते हैं, जबकि निम्न तापमान वाले पिंड अधिक तरंगदैर्घ्य (लाल/अवरक्त) की विकिरण उत्सर्जित करते हैं।
उदाहरण
- कमरे के तापमान (300 K) पर अधिकतम विकिरण अवरक्त (Infrared) क्षेत्र में होती है, जिसे हम आँखों से नहीं देख सकते परंतु ऊष्मा के रूप में महसूस कर सकते हैं।
- सूर्य के प्रष्ठ का तापमान (6000 K) पर अधिकतम विकिरण दृश्य प्रकाश (पीला-हरा क्षेत्र) में उत्सर्जित होती हैं, इसी कारण सूर्य का प्रकाश हमें चमकीला दिखाई देता है।
उदाहरण 1.
सौर विकिरण की अधिकतम तीव्रता 470 नैनोमीटर तरंगदैर्ध्य परास के निकट पाई जाती है। यह मानते हुए कि सूर्य का प्रष्ठ एक पूर्ण अवशोषक (a = 1) की भांति व्यवहार करता है, सौर प्रष्ठ के तापमान की गणना कीजिए।
हल :
क्यूंकि a = 1, सूर्य को एक कृष्णिका पिंड माना जा सकता है। वीन का विस्थापन नियम प्रयोग करने पर,
उदाहरण 2.
एक भट्टी का ताप 2000°C है। इसके स्पेक्ट्रम में अधिकतम तीव्रता 4000 Å पर प्राप्त होती है। यदि अधिकतम तीव्रता 2000 Å पर हो तो भट्टी के ताप की °C में गणना कीजिए।
हल :
उदाहरण 3.
एक गर्म कृष्णिका 16 Jm–2s–1 की दर से ऊर्जा उत्सर्जित करती है और इसकी सर्वाधिक तीव्र विकिरण 20,000 Å तरंगदैर्ध्य के संगत प्राप्त होती है। जब इस पिंड का तापमान और बढ़ा दिया जाता है और यदि अब सर्वाधिक तीव्र विकिरण 10,000 Å तरंगदैर्ध्य के संगत प्राप्त होती हो, तो Jm–2s–1 में विकीर्ण ऊर्जा का मान ज्ञात कीजिए।
हल :
वीन का विस्थापन नियम प्रयोग करने पर,
यहाँ, λm का मान आधा हो गया है ⇒ तापमान का मान दोगुना हो जाएगा
स्टीफन के नियम से,
