विकिरण
विकिरण :- ऊष्मा के एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानान्तरण की वह विधि जिसमें माध्यम के कण गति नहीं करते हैं, विकिरण कहलाती है।
उदाहरण के लिए, यदि आप किसी वस्तु को गर्म करके उसे निर्वात (खाली स्थान जहाँ वायु या अन्य पदार्थ नहीं होता) में रखते हैं, तब भी वह ऊष्मा खोएगी—भले ही उसके आसपास ऊष्मा अवशोषित करने के लिए कुछ भी न हो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऊष्मा चालन (जिसके लिए ठोस/तरल पदार्थों की आवश्यकता होती है) या संवहन (जिसके लिए वायु अथवा जल जैसे तरल पदार्थों की आवश्यकता होती है) के माध्यम से बाहर नहीं निकल पाती। अपितु, ऊष्मा अदृश्य प्रकाश तरंगों (अवरक्त विकिरण) के रूप में निकलती है। विकिरण को ऊष्मा स्थानांतरित करने के लिए किसी भी पदार्थ (जैसे वायु अथवा जल) की आवश्यकता नहीं होती। विकिरण के द्वारा ही पृथ्वी तक सूर्य की ऊर्जा पहुंचती है।
विकिरण के गुणधर्म
ऊष्मीय विकिरण, प्रकाश की भांति ही कई गुण प्रदर्शित करती है। यह भी एक विद्युतचुंबकीय तरंग (electromagnetic wave) होती है, जिसकी तरंगदैर्घ्य (wavelength) प्रकाश से अधिक होती है। इसके प्रमुख गुणधर्म निम्नलिखित हैं :
1. ऊष्मीय विकिरण सीधी रेखा में यात्रा करती है : यह प्रकाश की भांति सीधी रेखा में चलती है। यदि विकिरण के मार्ग में कोई वस्तु रख दी जाए तो उसके पीछे छाया बन जाती है।
उदाहरण: यदि किसी ऊष्मा स्रोत के सामने धातु की प्लेट रखी जाए और पीछे एक अवरक्त (infrared) संसूचक (detector) रखा जाए, तो संसूचक पर उस प्लेट की छाया दिखाई देगी।
2. यह निर्वात में भी गमन कर सकती है : ऊष्मीय विकिरण को संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
उदाहरण: सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक निर्वात में से होकर विकिरण द्वारा ही पहुँचती है।
3. विकिरण की तीव्रता व्युत्क्रम वर्ग नियम (Inverse Square Law) का पालन करती है : विकिरण की तीव्रता स्रोत से दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
उदाहरण: यदि किसी ऊष्मा स्रोत से दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो विकिरण की तीव्रता एक-चौथाई रह जाती है।
4. यह परावर्तन (Reflection), अपवर्तन (Refraction) और व्यतिकरण (Interference) दर्शाती है : तापीय विकिरण, प्रकाश की भांति परावर्तित, अपवर्तित तथा व्यतिकरित हो सकती है।
उदाहरण: एक चिकनी धातु का प्रष्ठ ऊष्मीय विकिरण को परावर्तित कर सकता है, और विशेष प्रिज्म इसके अपवर्तन में सहायक होते हैं।
5. यह ध्रुवित (Polarized) हो सकती है : ऊष्मीय विकिरण को निकोल प्रिज्म (Nicol Prism) जैसे उपकरणों से प्रकाश की भांति ध्रुवीकृत किया जा सकता है।
उदाहरण: जब ध्रुवित (polarized) ऊष्मीय विकिरण एक दूसरे प्रिज्म (विश्लेषक) (analyzer) से विशिष्ट कोण पर पारित होती है, तो इसकी तीव्रता परिवर्तित हो जाती है अथवा विकिरण लुप्त हो सकती है।
6. यह विद्युतचुंबकीय तरंगों के अवरक्त क्षेत्र (Infrared Region) में आती है : ऊष्मीय विकिरण में मुख्य रूप से अवरक्त तरंगें होती हैं, जो मानव आँखों से नहीं देखी जा सकतीं।
उदाहरण: अँधेरे में भी अवरक्त कैमरा गर्म वस्तुओं को पहचान सकता है।
7. किसी माध्यम से पारित होने पर यह उसे थोड़ा गर्म करती है : जब विकिरण किसी माध्यम से पारित होती है, तो माध्यम की अवशोषण क्षमता (absorptive power) के अनुसार कुछ ऊर्जा अवशोषित होती है और माध्यम का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है।
उदाहरण: शीशा (glass) अवरक्त विकिरण को कुछ मात्रा में अवशोषित करता है और गर्म हो सकता है।
8. अवरक्त वर्णक्रम (Infrared Spectrum) प्राप्त करने के लिए विशेष प्रिज्म का प्रयोग होता है : सामान्य काँच या क्वार्ट्ज प्रिज्म अवरक्त विकिरण को अवशोषित कर लेते हैं, इसलिए इनका उपयोग नहीं किया जाता। ऊष्मीय विकिरण का अवरक्त वर्णक्रम प्राप्त करने के लिए इनके स्थान पर विशेष प्रिज्मों जैसे, KCl प्रिज्म, रॉक सॉल्ट प्रिज्म (Rock Salt), फ्लुओरस्पार प्रिज्म (Fluorspar) आदि का प्रयोग किया जाता है।
9. विकिरण की तीव्रता बोलोमीटर से मापी जाती है : बोलोमीटर एक संवेदनशील यंत्र है जो विकिरण की तीव्रता को मापता है।
उदाहरण: खगोलशास्त्र में अवरक्त विकिरण मापने के लिए बोलोमीटर का प्रयोग किया जाता है।
10. विकिरण किसी प्रष्ठ पर दाब आरोपित करती है : जब ऊष्मीय विकिरण किसी प्रष्ठ पर आपतित होती है, तो यह उस पर एक अल्प मात्रा में दाब आरोपित करती है, जिसे विकिरण दाब (Radiation Pressure) कहते हैं।
उदाहरण: अत्यंत कम मात्रा में होने के बावजूद यह प्रभाव अंतरिक्ष यानों में सौर पाल (solar sail) तकनीक में उपयोग होता है।
निष्कर्ष
इन सभी गुणों से यह सिद्ध होता है कि ऊष्मीय विकिरण प्रकाश के समान व्यवहार करती है और यह भी एक विद्युतचुंबकीय तरंग है। इसका प्रमुख अंतर यह है कि इसकी तरंगदैर्घ्य दृश्य प्रकाश से अधिक होती है, इसलिए यह अवरक्त तरंगों (Infrared Rays) के रूप में जानी जाती है।
ऊष्मीय विकिरण से सम्बंधित मूलभूत परिभाषाएँ
निम्न पद यह बताते हैं कि किसी वस्तु द्वारा ऊर्जा ऊष्मीय विकिरण के रूप में किस प्रकार संग्रहित, अवशोषित और उत्सर्जित की जाती है :
(1). उर्जा घनत्व (Energy Density) (u) : यह स्रोत के चारों ओर किसी भी बिंदु पर प्रति इकाई आयतन में उपस्थित ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा से संबंधित होता है। इसे दो प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है :
(A). स्पैक्ट्रमी ऊर्जा घनत्व (Spectral energy density) (uλ) : किसी विशिष्ट तरंगदैर्ध्य (λ) पर प्रति इकाई आयतन में प्रति इकाई तरंगदैर्ध्य अंतराल में उपस्थित विकिरण ऊर्जा को स्पैक्ट्रमी ऊर्जा घनत्व कहते हैं, अर्थात यह (λ – ½) और (λ + ½) के मध्य की ऊर्जा को दर्शाता है। यह बताता है कि किसी विकिरण क्षेत्र में ऊर्जा विभिन्न तरंगदैर्ध्यों (या आवृत्तियों) में किस प्रकार वितरित होती है। यह λ के मान और ऊष्मा स्रोत के तापमान पर निर्भर करता है।
SI मात्रक : J/m3 Å अथवा J/m⁴
(B). कुल ऊर्जा घनत्व (Total energy density) (uλ) : किसी बिन्दु पर सभी तरंगदैध्र्य परास (0 से ∞ तक) के लिए प्रति एकांक आयतन में उपस्थित कुल ऊर्जा को कुल ऊर्जा घनत्व कहते हैं।
SI मात्रक : J/m3
(2). अवशोषण क्षमता अथवा अवशोषण गुणांक (Absorptive power or absorptive coefficient) (a) : अवशोषण क्षमता (जिसे अवशोषण गुणांक भी कहा जाता है) किसी प्रष्ठ या पदार्थ की वह क्षमता होती है, जिससे वह उस पर आपतित होने वाली ऊष्मीय विकिरण का एक भाग अवशोषित कर लेता है। अवशोषण क्षमता को दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है :
(A). स्पैक्ट्रमी अवशोषण क्षमता अथवा एकवर्णी अवशोषण गुणांक (Spectral absorptive power or monochromatic absorptive coefficient) (aλ) : स्पैक्ट्रमी अवशोषण क्षमता को किसी प्रष्ठ द्वारा किसी विशेष तरंगदैर्घ्य पर अवशोषित विकिरण की मात्रा (Qaλ) और उसी तरंगदैर्घ्य पर उस प्रष्ठ पर आपतित कुल विकिरण ऊर्जा की मात्रा (Qλ) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह मापती है कि कोई प्रष्ठ किसी विशिष्ट तरंगदैर्घ्य की विकिरण ऊर्जा को कितनी दक्षता से अवशोषित कर सकता है।
(B). कुल अवशोषण क्षमता अथवा अवशोषण गुणांक (Total Absorptive Power or Absorptive Coefficient) (a) : कुल अवशोषण क्षमता को किसी प्रष्ठ द्वारा सभी तरंगदैर्घ्य की विकिरण के संगत अवशोषित कुल ऊर्जा (Qa) और उस प्रष्ठ पर आपतित कुल विकिरण ऊर्जा (Q) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया गया है।
यह दर्शाता है कि कोई प्रष्ठ सम्पूर्ण आपतित तापीय विकिरण स्पेक्ट्रम को, न कि केवल किसी एक विशेष तरंगदैर्घ्य पर, कितनी कुशलता से अवशोषित करती है। साथ ही, किसी दी गई तरंगदैर्घ्य पर :
aλ और a दोनों मात्रकहीन हैं। आदर्श कृष्णिका (ideal black body) के लिए, aλ = 1 और a होता है, क्योंकि आदर्श कृष्णिका एक पूर्ण अवशोषक होती है — यह विकिरण का कोई भी भाग न तो परावर्तित करती है और न ही संप्रेषित (transmit) करती है।
(3). उत्सर्जन क्षमता (E) : उत्सर्जन क्षमता किसी प्रष्ठ द्वारा एकांक क्षेत्रफल से एकांक समय में उत्सर्जित ऊष्मीय विकिरण ऊर्जा की मात्रा को कहते हैं।
यह मापता है कि कोई प्रष्ठ उष्मीय विकिरण को कितनी कुशलता से उत्सर्जित करती है।
उत्सर्जन क्षमता के प्रकार :
(A). स्पैक्ट्रमी उत्सर्जन क्षमता (Spectral Emissive Power) (eλ) : यह किसी विशेष तरंगदैर्घ्य λ पर प्रति एकांक क्षेत्रफल से प्रति एकांक समय और प्रति एकांक तरंगदैर्घ्य अंतराल में उत्सर्जित ऊर्जा की मात्रा होती है।
उदाहरण के लिए एक गर्म वस्तु अवरक्त क्षेत्र (Infrared region) में दृश्य क्षेत्र (Visible region) की तुलना में अधिक ऊर्जा उत्सर्जित करती है — इस अंतर को eλ दर्शाता है।
SI मात्रक : W/m2 Å
(B). कुल उत्सर्जन क्षमता (Total Emissive Power or Radiant Emittance) (E) : यह सभी तरंगदैर्घ्यों पर प्रति एकांक क्षेत्रफल से प्रति एकांक समय में उत्सर्जित कुल ऊर्जा होती है।
SI मात्रक : Watt/m2
दी गई वस्तु के प्रष्ठ का आपतित विकिरण के प्रति व्यवहार: परावर्तन, अवशोषण, पारगमन और उनके गुणांक
जब किसी पिंड के प्रष्ठ पर विकिरण आपतित होती है, तो निम्नलिखित प्रक्रियाएँ होती हैं, जिनके कारण विकिरण तीन भागों में विभाजित हो जाती है : (a) परावर्तन, (b) अवशोषण, और (c) पारगमन।
ऊर्जा संरक्षण से,
यहाँ,
r = परावर्तक गुणांक = Qr/Q
a = अवशोषण गुणांक = Qa/Q
t = पारगमन गुणांक = Qt/Q
यदि :-
(1). r = 1 , a = 0 और t = 0 ⇒ पूर्ण परावर्तक पृष्ठ
(2). a = 1 , r = 0 और t = 0 ⇒ आदर्श अवशोषक पृष्ठ (आदर्श कृष्णिका वस्तु) (IBB)
(3). t = 1 , a = 0 और r = 0 ⇒ पूर्ण पारगमक पृष्ठ (diathermanous डायथर्मनस)
परावर्तन क्षमता =
अवशोषण क्षमता =
पारगमन क्षमता =
उदाहरण 1.
किसी पदार्थ की सतह पर की दर से ऊष्मा ऊर्जा आपतित होती है। यदि अवशोषण गुणांक 0.8 और परावर्तन गुणांक 0.1 है, तो पदार्थ के माध्यम से 5 मिनट में संचरित ऊष्मीय ऊर्जा की मात्रा है :
(A) 100 J
(B) 500 J
(C) 700 J
(D) 900 J
हल :
यहाँ Q =
क्यूंकि , अतः
अब,
इसलिए 5 मिनट में पदार्थ से संचरित ऊष्मीय ऊर्जा की मात्रा,
सही विकल्प (B) है।
उदाहरण 2.
एक प्रष्ठ पर 100 इकाई ऊर्जा आपतित होती है। इसमें 20 इकाई तरंगदैर्ध्य λ1 की, 30 इकाई तरंगदैर्ध्य λ2 की और शेष 50 इकाई अन्य तरंगदैर्ध्य की हैं। प्रष्ठ द्वारा कुल 60 इकाई ऊर्जा अवशोषित की जाती है। इन 60 इकाइयों में से 5 इकाई λ1 की और 25 इकाई λ2 की हैं। a, और
ज्ञात कीजिए।
हल :
कुल अवशोषण क्षमता/अवशोषण गुणांक (a),
λ1 के संगत स्पैक्ट्रमी अवशोषण क्षमता,
λ2 के संगत स्पैक्ट्रमी अवशोषण क्षमता,
यहाँ (0.83 > 0.25), यह इंगित करता है कि प्रष्ठ तरंगदैर्ध्य λ2 का अच्छा अवशोषक है।
उदाहरण 3.
किसी वस्तु पृष्ठ पर 400 J विकिरण आपतित होते हैं जिसमें से 20 % परावर्तित होते हैं तथा 120 J अवशोषित होते हैं। प्रतिशत पारगमन क्षमता क्या होगी ?
हल :
अतः पारगमन क्षमता 50% है।

