लेन्ज का नियम और उर्जा संरक्षण
लेन्ज का नियम और उर्जा संरक्षण :- जब कोई परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र किसी परिपथ में विद्युत धारा प्ररित करता है, तो यह प्ररित धारा भी अपना स्वयं का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। इस प्रेरित धारा की दिशा यादृच्छिक (random) नहीं होती – यह सदैव इस प्रकार प्रवाहित होती है कि उसी परिवर्तन का विरोध करे जिसके कारण यह उत्पन्न हुई थी।
इसी सिद्धांत को लेन्ज़ का नियम कहा जाता है, जिसे जर्मन वैज्ञानिक हेनरिक फ़्रीडरिख़ लेन्ज़ (Heinrich Friedrich Lenz) (1804–1865) ने वर्ष 1834 में प्रतिपादित किया था। लेन्ज़ का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का प्रत्यक्ष परिणाम है और विद्युतचुंबकीय प्रेरण को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लेंज़ के नियम का कथन
(लेन्ज का नियम और उर्जा संरक्षण)
प्रेरित धारा (अथवा प्रेरित विद्युतवाहक बल) की दिशा सदैव इस प्रकार होती है कि वह उस चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन का विरोध करती है जिसने उसे उत्पन्न किया है।
दूसरे शब्दों में, प्रकृति किसी भी चुंबकीय स्थिति में परिवर्तन का विरोध करती है। यदि आप किसी कुंडली में चुंबकीय फ्लक्स बढ़ाने का प्रयास करते हैं, तो प्रेरित धारा ऐसा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करेगी जो उसे कम करने का प्रयास करेगा। इसी प्रकार यदि आप फ्लक्स को घटाने का प्रयास करते हैं, तो प्रेरित धारा उसे बढ़ाने का प्रयास करेगी।
गणितीय अभिव्यक्ति
(लेन्ज का नियम और उर्जा संरक्षण)
लेन्ज़ का नियम विद्युतचुंबकीय प्रेरण के फ़ैराडे के द्वितीय नियम में लगे ऋणात्मक चिन्ह द्वारा दर्शाया जाता है :
यह ऋणात्मक चिन्ह बताता है कि प्रेरित विद्युतवाहक बल उस चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन का विरोध करता है जिसने उसे उत्पन्न किया है।
भौतिक व्याख्या
(लेन्ज का नियम और उर्जा संरक्षण)
मान लीजिए एक चुम्बक को एक कुंडली की ओर ले जाया जाता है :
- कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स बढ़ता है।
- लेन्ज़ के नियमानुसार, कुंडली में इस प्रकार प्रेरित धारा उत्पन्न होती है जिसका चुंबकीय क्षेत्र निकट आती चुंबक का विरोध करता है (अर्थात वह चुंबक को प्रतिकर्षित करता है)।
यदि एक चुम्बक को एक कुंडली से दूर ले जाया जाए :
- कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स घटता है।
- अब कुंडली में ऐसी प्रेरित धारा उत्पन्न होती है जिसका चुंबकीय क्षेत्र चुंबक को आकर्षित करता है, ताकि चुंबक के दूर जाने की गति का विरोध किया जा सके।
इस प्रकार, दोनों ही स्थितियों में प्रेरित धारा सदैव उसी परिवर्तन का विरोध करती है जिसने उसे उत्पन्न किया है।
प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करने के चरण
(लेन्ज का नियम और उर्जा संरक्षण)
(1). बाह्य (आरोपित) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा पहचानें।
सुनिश्चित करें कि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ लूप से होकर गुजर रही हों।
(2). देखें कि चुंबकीय फ्लक्स कैसे परिवर्तित हो रहा है।
जाँचें कि लूप से पारित होने चुम्बकीय फ्लक्स बढ़ रहा है, घट रहा है, या स्थिर है।
(3). प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निर्धारित करें जो फ्लक्स में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है।
- यदि फ्लक्स बढ़ रहा है, तो प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र बाह्य चुंबकीय क्षेत्र के विपरीत दिशा में होगा।
- यदि फ्लक्स घट रहा है, तो प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र बाह्य चुंबकीय क्षेत्र की समान दिशा में होगा।
- यदि फ्लक्स नियत है, तो कोई प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न नहीं होगा।
(4). प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करें।
चरण 3 में प्राप्त प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने वाली धारा की दिशा जानने के लिए दाएँ हाथ के नियम का प्रयोग करें।
लेन्ज का नियम और उर्जा संरक्षण
हमने ऊपर दिए गए आरेखों (भौतिक व्याख्या) में देखा है कि –
जब एक दण्ड चुंबक (bar magnet) को चालक कुंडली (conducting coil) की ओर बढ़ाया जाता है :
- कुंडली से पारित चुंबकीय फ्लक्स बढ़ता है।
- कुंडली में एक प्रेरित धारा (induced current) उत्पन्न होती है, जो ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है जो पास आते हुए चुंबक का विरोध करता है (अर्थात् उसे प्रतिकर्षित करती है)।
जब दण्ड चुंबक को कुंडली से दूर ले जाया जाता है :
- चुंबकीय फ्लक्स घटता है।
- कुंडली में विपरीत दिशा में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है, जो ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है जो चुंबक को आकर्षित करता है (अर्थात् उसके दूर जाने का विरोध करता है)।
इस प्रकार, कुंडली सदैव चुंबकीय फ्लक्स में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है।
ऊर्जा संरक्षण से संबंध
लेन्ज का नियम (Lenz’s Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Energy) का प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है — इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
यदि प्रेरित धारा (induced current) चुंबकीय फ्लक्स में हुए परिवर्तन का विरोध करने के स्थान पर उसे बढ़ाती, तो प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) लगातार चुंबकीय क्षेत्र को बढ़ाता रहता और बिना किसी बाह्य कार्य के ऊर्जा उत्पन्न होती — जो असंभव है।
परिवर्तन का विरोध करके, लेन्ज का नियम यह सुनिश्चित करता है कि —
- चुंबक या कुंडली को गतिमान करने के लिए प्रेरित धारा के विरुद्ध कार्य (work) करना आवश्यक होता है।
- इस कार्य में प्रयुक्त यांत्रिक ऊर्जा (mechanical energy) विद्युत ऊर्जा (प्रेरित धारा तथा ऊष्मा के रूप में) में परिवर्तित हो जाती है।
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(1). प्रेरित विद्युत वाहक बल (induced emf) कुंडली की प्रकृती या उसके प्रतिरोध पर निर्भर नहीं करता, और यह एक खुले परिपथ (open circuit) में भी अस्तित्व में रहता है।
(2). यदि परिपथ खुला हो (R = ∞), तो विद्युत वाहक बल emf प्रेरित तो होगा, किन्तु धारा प्रवाहित नहीं होगी।
(3). विद्युत वाहक बल emf का परिमाण कुंडली–चुंबक निकाय की सापेक्षिक गति के समानुपाती होता है, (e ∝ v).
(4). प्रेरित धारा (induced current) कुंडली या परिपथ के प्रतिरोध पर निर्भर करती है —
(5). कुंडली (या परिपथ) में कुल प्रेरित आवेश (total induced charge) उस समयांतराल पर निर्भर नहीं करता जिसके दौरान चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है; अर्थात् यह चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर अथवा कुंडली–चुंबक निकाय की सापेक्षिक गति पर निर्भर नहीं करता।
(6). प्रेरित आवेश, चुंबकीय फ्लक्स में हुए परिवर्तन तथा कुंडली/परिपथ के गुणधर्म (जैसे प्रतिरोध) पर निर्भर करता है।
उदाहरण 1.
(NCERT उदाहरण 6.4)
निम्न चित्र में विभिन्न आकार के समतल लूप जो चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं अथवा क्षेत्र से बाहर निकल रहे हैं, दिखाए गए हैं। चुंबकीय क्षेत्र लूप के तल के अभिलंबवत किन्तु प्रेक्षक से दूर जाते हुए है। लेंज के नियम का उपयोग करते हुए प्रत्येक लूप में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात कीजिए।
हल :
लूप (i) — आयताकार लूप
- आरोपित चुंबकीय क्षेत्र: कागज़/पृष्ठ के तल के लम्बवत भीतर की ओर (⊗)।
- फ्लक्स में परिवर्तन: जैसे-जैसे लूप चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है, इससे पारित चुंबकीय फ्लक्स का मान बढ़ता है (अधिक क्षेत्र रेखाएँ लूप से होकर गुजरती हैं)।
- प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र: फ्लक्स बढ़ने पर, प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र, आरोपित चुंबकीय क्षेत्र का विरोध करता है → अर्थात् पृष्ठ के बाहर की ओर (•)।
- प्रेरित धारा की दिशा: पृष्ठ के बाहर की ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए धारा वामावर्त (anticlockwise) दिशा में प्रवाहित होती है। (दायें हाथ का नियम: अंगूठा पृष्ठ से बाहर, उंगलियाँ वामावर्त मुड़ती हुई)। अतः धारा प्रवाह की दिशा a → b → c → d → a होगी।
परिणाम (i): प्रेरित धारा वामावर्त दिशा में बहती है।
लूप (ii) — त्रिभुजाकार लूप
- आरोपित चुंबकीय क्षेत्र: कागज़/पृष्ठ के तल के लम्बवत भीतर की ओर (⊗)।
- फ्लक्स में परिवर्तन: त्रिभुज क्षेत्र से बाहर जा रही है, इसलिए इससे पारित चुंबकीय फ्लक्स घटता है।
- प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र: फ्लक्स में कमी का विरोध करने के लिए, प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र को आरोपित (मूल) क्षेत्र का समर्थन करना होगा — अर्थात् वह भी पृष्ठ के भीतर की ओर (⊗) होगा।
- प्रेरित धारा की दिशा: दायें हाथ का नियम: अंगूठा पृष्ठ के भीतर की ओर → उंगलियाँ दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में मुड़ती हुई। अतः त्रिभुज के शीर्षों के अनुदिश धारा इस क्रम में प्रवाहित होगी :- a → c → b → a.
परिणाम (ii): प्रेरित धारा दक्षिणावर्त दिशा में बहती है।
लूप (iii) — अनियमित आकार का लूप (चुंबकीय क्षेत्र से बाहर जाता हुआ)
- आरोपित चुंबकीय क्षेत्र: पृष्ठ के भीतर की ओर (⊗)।
- फ्लक्स में परिवर्तन: लूप जैसे-जैसे चुंबकीय क्षेत्र वाले क्षेत्र से बाहर जाता है, इससे पारित चुम्बकीय फ्लक्स घटता है।
- प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र: फ्लक्स में कमी का विरोध करने के लिए प्रेरित चुम्बकीय क्षेत्र को पृष्ठ के भीतर की ओर (⊗) होना चाहिए।
- प्रेरित धारा की दिशा: दायें हाथ का नियम: अंगूठा पृष्ठ के भीतर की ओर → उंगलियाँ दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में मुड़ती हुई। अतः लूप के परितः प्रेरित धारा इस क्रम में प्रवाहित होगी :- a → d → c → b → a.
परिणाम (iii): प्रेरित धारा दक्षिणावर्त दिशा में बहती है।
उदाहरण 2.
(NCERT उदाहरण 6.5)
(a) एक बंद लूप, दो स्थिर रखे गए स्थायी चुंबकों के उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुवों के मध्य चुंबकीय क्षेत्र में स्थिर रखा गया है। क्या हम अत्यंत प्रबल चुंबकों का उपयोग करके लूप में धारा उत्पन्न होने की आशा कर सकते हैं ?
(b) एक बंद लूप विशाल संधारित्र की प्लेटों के मध्य स्थिर विद्युत क्षेत्र के अभिलंबवत गति करता है। क्या लूप में प्रेरित धारा उत्पन्न होगी (i) जब लूप संधारित्र की प्लेटों के पूर्णतः अंदर हो (ii) जब लूप आंशिक रूप से प्लेटों के बाहर हो ? विद्युत क्षेत्र लूप के तल के अभिलंबवत है।
(c) एक आयताकार लूप एवं एक वृत्ताकार लूप एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में से (जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है) क्षेत्र विहीन भाग में एकसमान वेग v से निकल रहे हैं। चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकलते समय, आप किस लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल के स्थिर होने की अपेक्षा करते हैं ? क्षेत्र, लूपों के तल के अभिलंबवत है।
(d) निम्न चित्र में वर्णित स्थिति के लिए संधारित्र की ध्रुवता की प्रागुक्ति (prediction) कीजिए।
हल :
(a). नहीं। चाहे चुंबक कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, प्रेरित धारा तभी उत्पन्न होती है जब लूप से पारित चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो।
(b). दोनों ही स्थितियों में कोई धारा प्रेरित नहीं होगी, क्योंकि केवल परिवर्ती चुंबकीय फ्लक्स ही प्रेरित धारा उत्पन्न कर सकता है, परिवर्ती विद्युत फ्लक्स नहीं। फ़ैराडे का नियम केवल चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन पर लागू होता है, न कि विद्युत फ्लक्स पर।
(c). आयताकार लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) नियत (constant) रहता है क्योंकि लूप का सीधा किनारा समान गति से चुंबकीय क्षेत्र की सीमा को पार करता है। इस कारण चुंबकीय क्षेत्र के भीतर आने वाला क्षेत्रफल (और इसलिए फ्लक्स) एक समान दर से घटता है। इसके विपरीत, वृताकार लूप जब चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकलता है, तो इसका क्षेत्रफल असमान रूप से घटता है, इसलिए इसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) नियत नहीं रहता।
(d). जब दोनों चुंबक लूप की ओर इसके अक्ष के अनुदिश आगे बढती हैं, तो लूप से पारित चुंबकीय फ्लक्स बढ़ता है। लेन्ज़ के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा इस वृद्धि का विरोध करती है। दायें हाथ के नियम का उपयोग करते हुए, प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि संधारित्र की प्लेट A धनात्मक हो जाती है और प्लेट B ऋणात्मक हो जाती है।
उदाहरण 3.
तांबे की एक बंद कुंडली जिसमें 10 फेरे हैं और जिसकी विमा 1 मीटर x 1 मीटर है, एक अक्ष के परितः घूमने के लिए स्वतंत्र है। कुंडली को 0.10 Wb/m2 के चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा गया है। इसे 0.01 सेकंड में 180º घुमाया जाता है। कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल और प्रेरित धारा क्रमशः होगी – (कुंडली का प्रतिरोध 2.0 Ω है)
उदाहरण 4.
उपरोक्त प्रश्न में कुंडली से प्रवाहित होने वाले विद्युत आवेश की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल :
उदाहरण 5.
जब प्राथमिक परिपथ में प्रतिरोध Rh को चित्र में दर्शाए अनुसार परिवर्तित किया जाता है, तो द्वितीयक परिपथ के प्रतिरोधक R में प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी ?
हल :
जब प्राथमिक परिपथ (primary circuit) में प्रतिरोध Rh को तीर द्वारा दिखाए अनुसार बढ़ाया जाता है, तो → परिपथ का कुल प्रतिरोध बढ़ जाता है → प्राथमिक में धारा घट जाती है → तथा प्राथमिक कुंडली का चुंबकीय क्षेत्र (जो अक्ष के अनुदिश दाएँ से बाएँ की ओर है) भी घट जाता है।
लेन्ज के नियम के अनुसार, द्वितीयक कुंडली (secondary coil) में ऐसी धारा उत्पन्न होती है जो इस घटते हुए चुंबकीय क्षेत्र का विरोध करे, अर्थात् द्वितीयक कुंडली ऐसा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करेगी जो उसी दिशा (दाएँ से बाएँ) में हो।
इसलिए, प्रतिरोध R में प्रेरित धारा A से B की ओर प्रवाहित होती है।
उदाहरण 6.
20 फेरों, 1 cm2 अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल और 2 Ω प्रतिरोध वाली एक ”सर्च-काॅयल“ के सिरे 40 Ω प्रतिरोध वाले एक प्रक्षेप धारामापी (ballistic galvanometer) (B.G.) से जुड़े हैं। ”सर्च-काॅयल“ का तल 1.5 Wb/m2 तीव्रता वाले चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में 30° पर झुका हुआ है। यदि कुण्डली को एकदम तेजी से क्षेत्र के बाहर शून्य चुम्बकीय क्षेत्र में खींच लिया जाये तो धारामापी से प्रवाहित आवेश की गणना कीजिये।
हल :
कुंडली से पारित चुम्बकीय फ्लक्स का प्रारंभिक मान,
जब कुंडली को क्षेत्र से बाहर खींचा जाता है, तो फ्लक्स शून्य हो जाता है,
अतः फ्लक्स में परिवर्तन,
धारामापी से प्रवाहित आवेश का मान,
(1). सर्च-काॅयल एक छोटी तार की कुंडली होती है, जिसका उपयोग परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र का पता लगाने या उसे मापने के लिए किया जाता है। यह फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम पर कार्य करती है, जिसके अनुसार – जब भी किसी कुंडली से पारित चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तित होता है तब उसमें एक विद्युत वाहक बल (emf) प्रेरित होता है। प्रेरित emf, फ्लक्स के परिवर्तन की दर के समानुपाती होती है। इसलिए, इस emf को मापकर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और दिशा का निर्धारण किया जा सकता है। सर्च कॉइल का उपयोग प्रयोगशालाओं में विद्युतचुंबकीय प्रेरण का अध्ययन करने तथा उपकरणों जैसे मेटल डिटेक्टर और चुम्बकीय क्षेत्र संसूचक (magnetic field sensors) में किया जाता है।
(2). प्रक्षेप धारामापी (ballistic galvanometer) (B.G.) एक अत्यंत संवेदनशील उपकरण है, जिसका उपयोग अल्प समय में परिपथ से पारित कुल आवेश (total charge) को मापने के लिए किया जाता है। सामान्य धारामापी जहाँ नियत धारा को मापता है, वहीं प्रक्षेप धारामापी क्षणिक emf (transient emf) द्वारा उत्पन्न धारा के अल्पकालिक स्पंदन (impulse of current) को मापता है। इसकी कुंडली का जड़त्वाघूर्ण (moment of inertia) काफी अधिक होता है और इससे पहले कि कुंडली घूमना प्रारम्भ करे, पूरा आवेश कुंडली में से प्रवाहित हो जाता है। कुंडली का प्रथम विचलन (first throw) कुल आवेश के समानुपाती होता है। इसे सामान्यतः विद्युतचुंबकीय प्रेरण संबंधी प्रयोगों में प्रेरित आवेश या चुम्बकीय फ्लक्स को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
उदाहरण 7.
एक वृत्ताकार कुंडली की त्रिज्या 10–2 m/s की दर से लगातार घट रही है। 1.5 × 10–3 Wb/m2 परिमाण का एक नियत और एकसमान चुंबकीय क्षेत्र कुंडली के तल के लंबवत आरोपित किया जाता है। यदि कुंडली में प्रेरित विद्युत-वाहक बल 2 μV हो तब कुंडली की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
हल :
प्रेरित विद्युत-वाहक बल (emf),
चूँकि कुंडली की त्रिज्या घट रही है, । सभी मान रखने पर, हम पाते हैं :
उदाहरण 8.
एक लंबे सीधे तार में धारा I = 4.35(1 + 2t) × 10–2 A नियत दर से बढ़ रही है। 1 mm त्रिज्या वाले एक छोटे वृत्ताकार लूप का तल तार के समांतर है और इसका केंद्र तार से 1 m की दूरी पर स्थित है। लूप का प्रतिरोध 9.2 × 10–4 Ω है। लूप में प्रेरित धारा का परिमाण और दिशा ज्ञात कीजिए।
हल :
चूँकि छोटे लूप की त्रिज्या (r = 1mm = 10-3 m) तार से उसकी दूरी (d = 1m) से बहुत कम है, हम लूप से पारित चुंबकीय क्षेत्र को लगभग नियत और उसके केंद्र पर मान के बराबर मान सकते हैं। एक लंबे सीधे तार से 𝑑 दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र (B) का मान :
लूप से पारित चुंबकीय फ्लक्स (Φ),
प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf),
और लूप में प्रेरित धारा,
जैसे-जैसे तार में धारा बढ़ती है, लूप से पारित चुंबकीय फ्लक्स भी बढ़ता है। लेन्ज़ के नियम के अनुसार, लूप में प्रेरित धारा इस परिवर्तन का विरोध करने के लिए विपरीत दिशा में प्रवाहित होगी, अर्थात वामावर्त (anticlockwise)।
उदाहरण 9.
तार के दो संकेन्द्रीय, समतलीय वृत्ताकार लूप, जिनमें से प्रत्येक का प्रतिरोध 10–4 Ωm–1 है, के व्यास 0.2 m और 2 m हैं। बड़े लूप पर समय-परिवर्ती विभवांतर V(t) = (4 + 2.5t) वोल्ट आरोपित किया गया है। छोटे लूप में प्रेरित धारा की गणना कीजिए।
हल :
प्रश्न में वर्णित स्थिति नीचे चित्र में दर्शाई गई है :
बड़े लूप में धारा,
वृत्ताकार लूपों के केंद्र पर इस धारा द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र,
चूँकि केंद्रीय लूप बाहरी लूप की तुलना में बहुत छोटा है (r <<R), हम छोटे लूप के सम्पूर्ण प्रष्ठ पर चुंबकीय क्षेत्र को नियत मान सकते हैं। छोटे लूप से पारित चुंबकीय फ्लक्स,
छोटे लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण,
अंततः छोटे लूप में प्रेरित धारा,
उदाहरण 10.
चित्र में r त्रिज्या और R प्रतिरोध का एक वृत्ताकार लूप दर्शाया गया है। B = B₀ e-t द्वारा प्रदत्त एक समय-परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र लूप के तल के लंबवत आरोपित किया जाता है। यदि कुंजी K बंद हो, तो कुंजी बंद करने के तुरंत पश्चात उत्पन्न विद्युत शक्ति की गणना कीजिए।
हल :
प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf),
कुंजी बंद करने के तुरंत पश्चात (t = 0), प्रेरित emf,
कुंजी (key) बंद करके तुरंत पश्चात प्रतिरोध R में विकसित होने वाली विद्युत शक्ति,
उदाहरण 11.
एक चुंबक को दो कुंडलियों AB और CD के मध्य तीर द्वारा दर्शाई गई दिशा में गतिमान किया जाता है, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। प्रत्येक कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात कीजिए।
For coil CD: सिरे D से देखने पर कुंडली CD में प्रेरित धारा भी दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में प्रवाहित होगी।
उदाहरण 12.
(b). यदि धारा का परिमाण घट रहा है, तो लूप में प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी ?
(c). यदि धारा के स्थान पर कोई इलेक्ट्रॉन उसी दिशा में गति करे तो क्या होगा ?

उदाहरण 13.
जब तार का एक छोटा टुकड़ा घोड़े की नाल के आकार के एक चुंबक के ध्रुवों के मध्य से 0.1 सेकंड में गुजरता है, तो उसमें 4 × 10-3 वोल्ट का विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। ध्रुवों के मध्य चुंबकीय फ्लक्स की गणना कीजिए।
हल :
प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण (emf),
अतः विकल्प (C) सही है।
उदाहरण 14.
गुरूत्वहीन समष्टि के भाग में एक असमरूप चुम्बकीय क्षेत्र विद्यमान है। L लम्बाई तथा m द्रव्यमान की एक समरूप चालक छड़ AB, x-अक्ष के अनुदिश विस्तारित है और इसका सिरा A मूल बिन्दु पर स्थित है। जब धारा i, A से B की और प्रवाहित होती है, तो सिरे A तथा द्रव्यमान केन्द्र की प्रारम्भिक त्वरण ज्ञात कीजिए।
हल :

बाएं सिरे (सिरा A) से x दूरी पर dx लंबाई के एक छोटे से भाग पर विचार करें; इस अल्पांश dx पर बल :
सम्पूर्ण छड़ पर लगने वाला बल :
अतः छड़ के द्रव्यमान केन्द्र की त्वरण :
अब छड़ पर स्थित किसी बिंदु की त्वरण ज्ञात करने के लिए, हम सबसे पहले छड़ के द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष कोणीय त्वरण की गणना करते हैं।
के कारण dx अल्पांश पर द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष बलाघूर्ण :
छड़ पर कुल बलाघूर्ण,
एकसमान छड़ का अपने केंद्र के परितः जड़त्व आघूर्ण । अतः कोणीय त्वरण,
अब, सिरे A की त्वरण,
जहाँ द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष A का स्थिति सदिश है।
यहाँ , अतः सिरे A की त्वरण :












