प्रतिरोधक पर प्रयुक्त AC वोल्टता
प्रतिरोधक पर प्रयुक्त AC वोल्टता :- माना एक शुद्ध प्रतिरोध R से एक प्रत्यावर्ती विद्युत स्रोत संयोजित किया गया है जैसा कि नीचे चित्र (a) में प्रदर्शित है।
माना प्रत्यावर्ती वोल्टता को निम्न समीकरण द्वारा प्रदर्शित किया जाता है :-
…..(1)
यदि I किसी समय t पर परिपथ में धारा का मान हो, तब प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर IR होगा। अब क्यूंकि परिपथ में और कोई अवयव नहीं है, अतः किसी भी समय प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर, आरोपित विद्युत वाहक बल के बराबर होना चाहिए, अर्थात
…..(2)
जहाँ , धारा का शिखर मान है।
समीकरण (2) परिपथ में प्रत्यावर्ती विद्युत धारा का व्यंजक है। की तुलना ओम के नियम से करने पर हम पाते हैं की AC परिपथ में धारा के मार्ग में प्रतिरोथ R के तुल्य है जो कि DC परिपथ में धारा के मार्ग में प्रतिरोथ R है।
अतः प्रतिरोध R का व्यवहार AC व DC परिपथ में समान होता है।
समीकरण (1) व समीकरण (2) की तुलना करने पर हम पाते हैं कि E व I समान कला में हैं। अतः प्रत्यावर्ती परिपथ जिसमें केवल प्रतिरोध (R) संयोजित हो तब प्रत्यावर्ती वोल्टता (E) व प्रत्यावर्ती धारा (I) समान कला में होते हैं जैसा कि उपरोक्त चित्र (c) में प्रदर्शित है।
फेजर आरेख
क्यूंकि E व I समान कला में हैं अतः चित्र (b) में वोल्टता फेजर E0 व धारा फेजर I0 समान दिशा में एक साथ घूर्णन करते हुए प्रदर्शित हैं। अर्थात प्रतिरोध R के सिरों पर प्रत्यावर्ती वोल्टता (E) व प्रत्यावर्ती धारा (I) के मध्य कालांतर (ωt – ωt = 0) शुन्य है।
वोल्टता फेजर E0 व धारा फेजर I0 के y-अक्ष पर प्रक्षेपण वोल्टता व धारा के तात्क्षणिक मानों को प्रदर्शित करते हैं, अर्थात
और
चालकत्व (K) (Conductance)
चालकत्व प्रतिरोध का व्युत्क्रम है। चालकत्व यह मापता है कि किसी पदार्थ में धारा कितनी सरलता से प्रवाहित हो सकती है।
चालकत्व
चालकत्व के मात्रक ओम-1 (Ω-1) है।
औसत शक्ति (Average Power)
शुद्ध प्रतिरोध युक्त परिपथ की तात्क्षणिक शक्ति :-
अब एक पूर्ण चक्र में sin2ωt का मान 1/2 होता है, अतः एक पूर्ण चक्र में परिपथ की औसत शक्ति :-
अब हम जानते हैं की प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान,
अतः
…..(3)
साथ ही,
अतः
…..(4)
समीकरण (3) व (4) शुद्ध प्रतिरोधक युक्त AC परिपथ की औसत शक्ति के व्यंजक हैं।
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