गतिक विद्युत वाहक बल
गतिक विद्युत वाहक बल :- नीचे चित्र में दिखाए अनुसार, एक समान चुंबकीय क्षेत्र B में v वेग से गतिमान l लम्बाई के एक चालक पर विचार करें :
तार के भीतर इलेक्ट्रॉन भी v वेग से गति करते हैं, और प्रत्येक पर एक चुंबकीय बल लगता है, जिसका परिमाण F = evB है। यह बल इलेक्ट्रॉनों को चालक के एक सिरे की ओर (चित्र में नीचे की ओर) धकेलता है। जैसे ही इलेक्ट्रॉन एक ओर एकत्रित होते हैं, उसका विपरीत सिरा धनावेशित हो जाता है, जिससे आवेशों का पृथक्करण (separation of charges) होता है और चालक के भीतर एक विद्युत क्षेत्र का निर्माण होता है।
आवेश वाहक तब तक पृथक होते रहते हैं जब तक विद्युत बल FE = eE, चुंबकीय बल FB = evB को पूरी तरह संतुलित नहीं कर देता, और एक साम्यावस्था प्राप्त नहीं हो जाती। ऐसा तब होता है जब :
…..(1)
इसलिए, हम कह सकते हैं कि एक गतिशील चालक में आवेश वाहकों पर आरोपित चुंबकीय बल, चालक के भीतर एक विद्युत क्षेत्र E = vB उत्पन्न करता है।
यह विद्युत क्षेत्र, गतिशील चालक के दोनों सिरों के मध्य एक विद्युत विभवांतर उत्पन्न करता है।
विद्युत क्षेत्र और विद्युत विभव के मध्य संबंध का उपयोग करते हुए,
गतिमान चालक की लंबाई के अनुदिश,
समाकलन करने पर,
गतिक विद्युत वाहक बल का सूत्र (Motional emf formula)
ΔV = Blv …..(2)
इस प्रकार, चुंबकीय क्षेत्र में एक चालक की गति से इसके सिरों के मध्य एक विभवांतर ΔV=Blv (जिसे गतिक विद्युत वाहक बल कहा जाता है) उत्पन्न होता है, जो चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और चालक के वेग पर निर्भर करता है।
गतिक विद्युत वाहक बल का सदिश निरूपण
साम्यावस्था के समय इलेक्ट्रान पर कुल बल शुन्य होता है, अतः
अब क्यूंकि,
अतः
समाकलन करने पर,
…..(3)
उपरोक्त समीकरण (3) गतिक विद्युत वाहक बल का सदिश निरूपण है।
एक बैटरी के विद्युत वाहक बल और गतिक विद्युत वाहक बल के मध्य अनुरूपता (समानता)
गतिशील चालक में उत्पन्न विभवांतर और बैटरी द्वारा उत्पन्न विभवांतर के मध्य एक रोचक अनुरूपता पाई जाती है। बैटरी एक अविद्युत (रासायनिक) बल—जिसे प्रायः ‘चार्ज एस्केलेटर (charge escalator)’ कहा जाता है—का उपयोग करके धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों को पृथक करती है। बैटरी का विद्युत वाहक बल (ε) उन आवेशों को पृथक करने में प्रति इकाई आवेश (W/q) पर किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है। चूँकि यह आवेश-विभाजन रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा होता है, इसलिए बैटरी को रासायनिक विद्युत वाहक बल का स्रोत कहा जाता है।
इसी प्रकार, एक गतिशील चालक में विभवांतर इसलिए उत्पन्न होता है क्योंकि चुंबकीय बल आवेशों को पृथक करने का कार्य करते हैं। इसे आप एक प्रकार की ‘बैटरी’ मान सकते हैं, जिसका विद्युत वाहक बल (emf) रासायनिक प्रक्रिया से नहीं अपितु गति से उत्पन्न होता है—यह विद्युत वाहक बल केवल तभी उत्पन्न होता है जब चालक गतिशील हो, और गति रुकते ही इसका मान शून्य हो जाता है।
एक परिपथ द्वारा परिबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन द्वारा गतिक विद्युत वाहक बल
एक आयताकार चालक लूप PQRS पर विचार कीजिये, जिसे एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा गया है, जो लूप के तल के लंबवत है (मान लीजिए, पृष्ठ के लम्बवत भीतर की ओर)।
MN लंबाई l का एक गतिशील चालक है, जो चालक पटरियों PQ और RS के अनुदिश एकसमान वेग v से गतिशील है। मान लीजिए कि घर्षण के कारण ऊर्जा का कोई ह्रास नहीं होता। MQRN एक बंद परिपथ बनाता है जिसका क्षेत्रफल MN के गति करने पर परिवर्तित होता है। यदि किसी क्षण लंबाई RN = x हो, तब लूप MQRN से पारित चुंबकीय फ्लक्स :
चूँकि x समय के साथ परिवर्तित हो रहा है, फ्लक्स ΦB के परिवर्तन की दर एक विद्युत वाहक बल (emf) प्रेरित करेगी जो निम्न प्रकार है :
यहाँ , चालक MN का वेग है, अतः प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) :
…..(4)
ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि प्रेरित धारा ऐसी दिशा में प्रवाहित होती है जो पृष्ठ के बाहर की ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, ताकि पृष्ठ के भीतर फ्लक्स में हो रही वृद्धि का विरोध किया जा सके (लेन्ज़ का नियम)। गतिक गतिक विद्युत वाहक बल (emf) का परिमाण Blv है।
यदि परिपथ का कुल प्रतिरोध R हो, तब प्रेरित धारा ओम के नियम द्वारा इस प्रकार दी जाती है :
…..(5)
चालक को स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक बल
(गतिक विद्युत वाहक बल)
गतिमान चालक MN से अब एक प्रेरित धारा I प्रवाहित हो रही है और यह एक चुंबकीय क्षेत्र में स्थित है। चूँकि चुंबकीय क्षेत्र धारावाही तार पर एक बल आरोपित करता है, जिसकी दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम का उपयोग करके निर्धारित की जा सकती है। इस स्थिति में, चुंबकीय बल बाईं ओर कार्य करता है, जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है, और इसका परिमाण FB = BIl है।
यह ‘चुंबकीय अवरोध’ (magnetic drag) चालक MN को धीमा करेगा और अंततः रोक देगा, जब तक कि उसे गतिशील रखने के लिए बराबर परिमाण का विपरीत दिशा में एक बाह्य खींचने वाला बल Fext न लगाया जाए। अतः समीकरण (4) का उपयोग करते हुए, तार को नियत वेग v से खींचने के लिए आवश्यक बल इस प्रकार दिया जाता है :
…..(6)
ऊर्जा का विश्लेषण – ऊर्जा संरक्षण
चालक MN को पटरियों के अनुदिश खींचने के लिए एक बाह्य कार्य की आवश्यकता होती है। चालक को दी गई ऊर्जा का क्या हुआ ? क्या यह ऊर्जा संरक्षित रहती है ? इसे समझने के लिए कार्य की अपेक्षा शक्ति (power) के संदर्भ में सोचना अधिक सरल होगा। (यदि आप कुल ऊर्जा का सीधे अनुसरण (ट्रैक) करने का प्रयास करें, तो यह जटिल हो जाएगा क्योंकि ऊर्जा निरंतर एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो रही है और समय के साथ विसरित होती रहती है।) शक्ति उस दर को दर्शाती है जिस दर से चालक पर कार्य किया जाता है।
चालक पर लगाए गए बल द्वारा परिपथ को दी गई यांत्रिक शक्ति है :
…..(7)
परिपथ में क्षयित विद्युत शक्ति :
…..(8)
समीकरण (7) और (8) से यह स्पष्ट है कि बाह्य बल (खींचने वाला) द्वारा प्रदान यांत्रिक शक्ति परिपथ में पूर्ण रूप से विद्युत शक्ति में परिवर्तित हो जाती है, यह दर्शाता है कि दोनों अभिव्यक्तियाँ समान हैं और ऊर्जा संरक्षित है।
चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णन करती एक छड़ के सिरों पर विभवांतर
L लंबाई की एक चालक छड़ पर विचार कीजिये, जो अपने एक सिरे (मान लीजिये सिरा O) के परित एक समान कोणीय वेग ω से घूर्णन कर रही है। यह घूर्णन एक समान चुंबकीय क्षेत्र B में हो रहा है जो घूर्णन के तल के लम्बवत दिशा में (कागज़ के पृष्ठ के भीतर की ओर) निर्देशित है।
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार, छड़ में इलेक्ट्रॉन धुरी (किलक,अक्ष) की ओर निर्देशित एक चुंबकीय बल का अनुभव करते हैं। परिणामस्वरूप, छड़ का बाह्य सिरा धनात्मक हो जाता है, जबकि आंतरिक सिरा (धुरी) ऋणात्मक हो जाता है।
विधि I
चूँकि छड़ कोणीय वेग ω से घूर्णन कर रही है, इसलिए धुरी से r दूरी पर छड़ के किसी भी अवयव की रेखीय चाल v = ωr होगी। समीकरण (1) का उपयोग करते हुए, इस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता है :
E = vB = ωrB …..(9)
छड़ के अनुदिश E की दिशा धुरी की ओर है, और E का परिमाण धुरी से बाहर की ओर बढ़ता है। E का r के सापेक्ष केंद्र से बाहर की ओर समाकलन करने पर, छड़ के सिरों के मध्य विभवांतर है :
अतः उत्पन्न विद्युत वाहक बल (emf),
…..(10)
विधि II
धुरी से r दूरी पर स्थित dr लंबाई के एक अल्पांश पर विचार कीजिये। चुंबकीय क्षेत्र के लम्बवत गतिमान इस अल्पांश के सिरों पर प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण :
dε = Bvdr = Bωrdr
छड़ की लंबाई के अनुदिश dε का समाकलन करने पर, हमें कुल प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) प्राप्त होगा:
उदाहरण 1.
NCERT उदाहरण 6.7
एक पहिया जिसमें 0.5 m लंबे 10 धात्विक स्पोक (spokes) हैं, को 120 चक्र प्रति मिनट की दर से घुमाया जाता है। पहिये का घूर्णन तल उस स्थान पर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक HE के अभिलंबवत है। उस स्थान पर यदि HE = 0.4 G है तो पहिये की धुरी (axle) तथा रिम के मध्य स्थापित प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान क्या होगा ? नोट कीजिए 1 G = 10–4 T
हल :
घूमते हुए पहिये में स्पोक (spokes) की संख्या कुल प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) को प्रभावित नहीं करती, क्योंकि सभी स्पोक समान भीतरी घेरे (inner rim (hub)) और बाह्य घेरे (outer rim) से जुड़े होते हैं। इसका अर्थ है कि विभिन्न स्पोक्स में उत्पन्न विद्युत वाहक बल समानांतर क्रम में हैं, और इसलिए बाह्य रिम और धुरी के मध्य का विभवांतर स्पोक्स की संख्या पर निर्भर नहीं करता—चाहे स्पोक्स कम हों या अधिक, विभवांतर समान रहता है।





