उत्सर्जकता
उत्सर्जकता :- जब किसी वस्तु को गर्म किया जाता है, तो वह ऊष्मीय विकिरण उत्सर्जित करती है। समान तापमान पर एक आदर्श कृष्णिका की तुलना में किसी सतह द्वारा उत्सर्जित विकिरण की दक्षता को उत्सर्जकता कहते हैं।
उत्सर्जकता (ε) को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है :
किसी वस्तु द्वारा प्रति इकाई क्षेत्रफल व प्रति इकाई समय में उत्सर्जित विकिरण ऊर्जा का उसी तापमान पर एक आदर्श कृष्णिका (Ideal Black Body) द्वारा उत्सर्जित विकिरण ऊर्जा से अनुपात।
उत्सर्जकता :
- एक मात्रकहीन व विमाहीन राशि
- एक आदर्श कृष्णिका के लिए ε = 1
- परास 0 < ε ≤ 1
उत्सर्जकता को प्रभावित करने वाले कारक
- पदार्थ की प्रकर्ति : सामान्यतः धातुओं की उत्सर्जकता कम (0.05 – 0.2) होती है, जबकि अधातुओं और रंगे हुए पृष्ठों की उत्सर्जकता का मान अधिक होता है।
- सतह की प्रकर्ति : जो पृष्ठ चिकने और पॉलिश किये हुए होते हैं उनकी उत्सर्जकता खुरदरे और जंग लगे (oxidized) पृष्ठों से कम होती है।
- तापमान – कुछ पदार्थों का तापमान परिवर्तित होने पर उनकी उत्सर्जकता का मान थोड़ा परिवर्तित हो जाता है।
- तरंगदैर्घ्य (Wavelength) – उत्सर्जकता अलग-अलग तरंगदैर्घ्यों पर भिन्न-भिन्न हो सकती है।
