दर्पण का सूत्र

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दर्पण का सूत्र

 

 

दर्पण का सूत्र :- नीचे दिया गया चित्र तीन किरणों पर विचार करते हुए अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण का किरण आरेख दिखाता है। यह वस्तु AB का प्रतिबिंब A’B’ (इस स्थति में वास्तविक) दिखाता है।

दर्पण का सूत्र

 

उपरोक्त आकृति में बिंदु A से निकलने वाली केवल तीन किरणें दिखाई गई हैं, लेकिन वास्तव में किसी भी स्रोत से सभी दिशाओं में अनंत संख्या में किरणें निकलती हैं। यहाँ, बिंदु A′, A का प्रतिबिम्ब बिंदु होगा, यदि बिंदु A से निकलने वाली और परावर्तन के बाद अवतल दर्पण पर गिरने वाली प्रत्येक किरण बिंदु A′ से होकर गुजरती है।

आइए अब हम दर्पण का सूत्र या वस्तु दूरी (u), प्रतिबिम्ब दूरी (u) और फोकल लम्बाई (f) के बीच संबंध प्राप्त करें।

आकृति में दो समकोण त्रिभुज A′B′F और MPF समरूप हैं। (उपकाशीय किरणों के लिए, MP को CP के लंबवत सीधी रेखा माना जा सकता है।) इसलिए,

\displaystyle \frac{B'A'}{PM}=\frac{B'F}{FP}

या \displaystyle \frac{B'A'}{BA}=\frac{B'F}{FP}(\because PM=AB) …..(1)

क्यूंकि ∠ APB = ∠ A′PB′, समकोण त्रिभुजें A′B′P और ABP भी समरूप हैं अतः,

\displaystyle \frac{B'A'}{BA}=\frac{B'P}{BP} …..(2)

समीकरण (1) व (2) से,

\displaystyle \frac{B'F}{FP}=\frac{B'P-FP}{FP}=\frac{B'P}{BP} …..(3)

अब चिन्ह परिपाटी से….

B′P = –v,   FP = –f,   BP = –u

यह चिन्ह परिपाटी समीकरण (3) पर लगाने से,

\displaystyle \frac{-v+f}{-f}=\frac{-v}{-u}

या

\displaystyle \frac{v-f}{f}=\frac{v}{u}

\displaystyle \Rightarrow \frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f} …..(4)

उपरोक्त सूत्र को दर्पण सूत्र कहते हैं

 

रैखिक आवर्धन(m) :-

प्रतिबिम्ब की ऊँचाई (h′) और वस्तु की ऊँचाई (h) के अनुपात को रैखिक आवर्धन कहते हैं।

\displaystyle m=\frac{h'}{h}

h और h′ को चिन्ह परिपाटी के अनुसार धनात्मक या ऋणात्मक लिया जाएगा। त्रिभुज A′B′P और ABP से,

\displaystyle \frac{B'A'}{BA}=\frac{B'P}{BP}

उपरोक्त समीकरण पर चिन्ह परिपाटी का प्रयोग करने पर…

\displaystyle \frac{-h'}{h}=\frac{-v}{-u}

\displaystyle m=\frac{h'}{h}=-\frac{v}{u} …..(5)

इस लेख में हमने अवतल दर्पण का उदहारण लेते हुए(वास्तविक प्रतिबिम्ब के लिए), समीकरण (4) में दर्पण सूत्र और समीकरण (5) में रैखिक आवर्धन का सूत्र बनाया है।

चिन्ह परिपाटी के उचित उपयोग के साथ, ये गोलाकार दर्पण (अवतल या उत्तल) द्वारा परावर्तन की सभी स्थितिओं के लिए भी मान्य हैं, चाहे प्रतिबिम्ब वास्तविक हो या आभासी।

रेखीय आवर्धन के अन्य रूप :-

(1) v और f  के पदों में :-

दर्पण सूत्र से,

\displaystyle \frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

उपरोक्त समीकरण को v से गुना करने पर,

\displaystyle \frac{v}{v}+\frac{v}{u}=\frac{v}{f}

\displaystyle 1+\frac{v}{u}=\frac{v}{f}

\displaystyle \Rightarrow \frac{v}{u}=\frac{v}{f}-1

अतः, \displaystyle m=-\frac{v}{u}=-\left( \frac{v-f}{f} \right)

या

\displaystyle m=\left( \frac{f-v}{f} \right) …..(6)

(1) u और f  के पदों में :-

दर्पण सूत्र से,

\displaystyle \frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

उपरोक्त समीकरण को u से गुना करने पर,

\displaystyle \frac{u}{v}+\frac{u}{u}=\frac{u}{f}

\displaystyle \frac{u}{v}+1=\frac{u}{f}

\displaystyle \frac{u}{v}=\frac{u}{f}-1=\frac{u-f}{f}

\displaystyle \Rightarrow \frac{v}{u}=\frac{f}{u-f}

अतः,

\displaystyle m=-\frac{v}{u}=-\left( \frac{f}{u-f} \right)

या

\displaystyle m=\left( \frac{f}{f-u} \right) …..(6)

अतः, अंत में,

\displaystyle m=\frac{h'}{h}=-\frac{v}{u}=\frac{f}{f-u}=\frac{f-v}{f} …..(7)

Note :-

  1. यदि m > 1, तब प्रतिबिम्ब का आकर > बिम्ब का आकर
  2. यदि m < 1, तब प्रतिबिम्ब का आकर < बिम्ब का आकर
  3. यदि m = 1, तब प्रतिबिम्ब का आकर = बिम्ब का आकर
  4. यदि m = +ve  ⇒ तब प्रतिबिम्ब आभासी और सीधा होगा
  5. यदि m = -ve  ⇒ तब प्रतिबिम्ब वास्तविक और उल्टा होगा

 

उदाहरण 1.

एक वस्तु 15 सेमी वक्रता त्रिज्या वाले अवतल दर्पण के सामने (i) 10 सेमी, (ii) 5 सेमी पर रखी गई है। प्रत्येक स्थिति में प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति और आवर्धन ज्ञात कीजिए।

हल:-

(a) अवतल दर्पण के लिए चिन्ह परिपाटी का उपयोग करने पर,

दर्पण सूत्र से

\displaystyle \frac{1}{f}=\frac{1}{v}+\frac{1}{u}

\displaystyle \frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}=-\frac{2}{15}+\frac{1}{10}=\frac{-1}{30}

v = -30 cm

प्रतिबिम्ब वास्तविक है और यह दर्पण के सामने 30 सेमी की दूरी पर बनता है।

आवर्धन

\displaystyle m=-\frac{v}{u}=-\frac{(-30)}{(-10)}=-3

इससे पता चलता है कि प्रतिबिम्ब उलटा और बिम्ब से 3 गुना बड़ा है।

(b) पुनः चिन्ह परिपाटी से,

\displaystyle \frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}=-\frac{2}{15}+\frac{1}{5}=\frac{-1}{30}=\frac{1}{15}

v = +15 cm

प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 15 सेमी की दूरी पर बनता है।

आवर्धन

\displaystyle m=-\frac{v}{u}=-\frac{(15)}{(-5)}=3

+3 आवर्धन दर्शाता है कि प्रतिबिंब आभासी और सीधा है।

उदाहरण 2.

मान लीजिए कि आप एक स्थिर कार में बैठे हुए हैं। आप 2 m वक्रता त्रिज्या के पार्श्व दृश्य दर्पण में एक धावक को अपनी और आता हुआ देखते हैं। यदि धावक 5 ms-1 की गति से दौड़ रहा है, तो धावक की छवि कितनी तेजी से चलती दिखाई देती है जब धावक (a) 39 मीटर, (b) 29 मीटर, (c) 19 मीटर, और (d) 9 मीटर दूर हो।

हल:-

दर्पण सूत्र से

\displaystyle v=\frac{uf}{u-f}

उत्तल दर्पण के लिए R = 2 m, f = 1 m तब,

u = -39 m के लिए, \displaystyle v=\frac{uf}{u-f}=\frac{(-39)(1)}{(-39)-(1)}=\frac{39}{40}m

Since the jogger moves at a constant speed of 5 ms–1, after 1 s the
position of the jogger u = –39 + 5 = –34m

चूँकि धावक 5 ms-1 की नियत गति से चलता है इसलिए, 1 सेकंड के बाद धावक की स्थिति u = -39 + 5 = -34m

इसलिए,  u = -34 m के लिए, \displaystyle v'=\frac{uf}{u-f}=\frac{(-34)(1)}{(-34)-(1)}=\frac{34}{35}m

1 सेकंड में धावक के प्रतिबिम्ब की स्थिति में परिवर्तन,

x = v – v’ = (39/40) – (34/35) = 1/280 m

यह परिवर्तन 1 सेकंड में होता है। इसलिए, जब धावक दर्पण से 39 मीटर और 34 मीटर के बीच होता है, तो प्रतिबिम्ब की औसत चाल (1/280) ms-1 होती है।

इसी प्रकार, यह देखा जा सकता है कि u = –29 m, –19 m और –9 m के लिए प्रतिबिम्ब जिस चाल से गति करता प्रतीत होता है वह क्रमशः

(1/150)ms-1(1/60)ms-1(1/10)ms-1, है

एक और तरीका

दर्पण सूत्र से \displaystyle v=\frac{uf}{u-f}

उपरोक्त समीकरण का समय के सापेक्ष अवकलन करने पर,

\displaystyle \frac{dv}{dt}=\frac{(u-f)\left[ f\frac{du}{dt} \right]-fu\left[ \frac{du}{dt} \right]}{{{(u-f)}^{2}}}

\displaystyle \Rightarrow \frac{dv}{dt}=-\frac{{{f}^{2}}}{{{(u-f)}^{2}}}\frac{du}{dt}

(a) जब धावक 39 मीटर दूर है,

\displaystyle \frac{dv}{dt}=-\frac{{{1}^{2}}}{{{(-39-1)}^{2}}}(5)=-3.125\times {{10}^{-3}}m/s

(b) जब धावक 29 मीटर दूर है,

\displaystyle \frac{dv}{dt}=-\frac{{{1}^{2}}}{{{(-29-1)}^{2}}}(5)=-5.56\times {{10}^{-3}}m/s

(c) जब धावक 19 मीटर दूर है,

\displaystyle \frac{dv}{dt}=-\frac{{{1}^{2}}}{{{(-19-1)}^{2}}}(5)=-0.0125m/s

(d) जब धावक 9 मीटर दूर है,

\displaystyle \frac{dv}{dt}=-\frac{{{1}^{2}}}{{{(-9-1)}^{2}}}(5)=-0.05m/s

ध्यान दें कि ऋणात्मक चिह्न विपरीत दिशा को दर्शाता है, इसलिए यदि वस्तु दर्पण की ओर बढ़ती है, तो उसका प्रतिबिंब विपरीत दिशा में (जो कि दर्पण की ओर भी होगा) गतिमान होगा।

 

 

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Manoj Kumar Verma

Hi, I'm Manoj Kumar Verma, a physics faculty having 7 years of teaching experience. I have done B.Tech (E.E.). I am also a YouTuber and Blogger. This blog is dedicated to help students learn the physics concepts easily.

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