फेजर आरेख | फेजर आरेख क्या है
फेजर आरेख | फेजर आरेख क्या है :- यह एक आरेख (diagram) होता है जो समान आवृति की प्रत्यावर्ती धारा और वोल्टता को एक सदिश (फेजर) रूप में प्रदर्शित कर उनके मध्य कला कोण (phase angle) के सम्बन्ध को दर्शाता है। फेजर आरेख को समझने के लिए निम्न राशियों का ज्ञान होना चाहेए :-
- कला और कलान्तर (Phase and phase difference) व
- पश्चगामी तथा अग्रगामी संकल्पना (Concept of lagging and leading)
(1). कला और कलान्तर (Phase and phase difference)
कला (Phase):
- कला वह राशी है जो प्रत्यावर्ती धारा या प्रत्यावर्ती वोल्टता के तात्क्षणिक मान व उस विशिष्ट समय पर राशी की स्थिति (अर्थात राशी धनात्मक अर्ध चक्र में है अथवा ऋणात्मक अर्ध चक्र में) का ज्ञान करवाती है।
- सरल भाषा में, यदि कोई ज्या (sin) अथवा कोज्या (cos) तरंग है, तो उसकी एक चक्रीय प्रकृति होती है। इस चक्र के किसी भी बिंदु को हम कला (phase) के रूप में माप सकते हैं।
- कला को डिग्री (°) या रेडियन (radians) में व्यक्त किया जाता है। एक पूरे चक्र में चक्रीय तरंग की कला 360° या 2π रेडियन होती है।
- उदाहरण के लिए, I = I0 sin (ωt + ϕ) में (ωt + ϕ) कला कोण (phase angle) कहलाता है व ϕ को प्रारंभिक कला (initial phase) कहते हैं।
- प्रारंभिक कला ϕ समय पर निर्भर नहीं करती व इसका मान नियत होता है और कला कोण (ωt + ϕ) का मान समय पर निर्भर करता है।
- यदि कोई ज्या (sin) तरंग अपने अधिकतम मान पर है, तो इसका कला कोण 90° या (π/2) रेडियन होगा।
कलान्तर (Phase difference)
- कलान्तर दो या से अधिक तरंगों के कला कोण का अंतर होता है।
- जब दो प्रत्यावर्ती तरंगें (जैसे AC धारा या वोल्टता) एक ही आवृत्ति की हों, किन्तु उनके शिखर मान (peaks) और गर्त (troughs) अलग – अलग समय पर होते हैं, तो उनके मध्य एक कलान्तर होता है।
- कलान्तर यह बताता है कि एक प्रत्यावर्ती तरंग दूसरी तरंग की तुलना में कितनी आगे या पीछे है। यह अंतर डिग्री या रेडियन में मापा जाता है।
- उदाहरण के लिए, यदि दो तरंगों का कलान्तर 90° है, तो एक तरंग अपने शिखर मान पर होगी जबकि दूसरी तरंग का उस समय मान शून्य होगा (अर्थात उस तरंग का चक्र प्रारम्भ हो रहा होगा)।
(2). पश्चगामी तथा अग्रगामी संकल्पना (Concept of lagging and leading)
पश्चगामी (Lagging) और अग्रगामी (Leading) अवधारणा का प्रयोग प्रत्यावर्ती परिपथ में वोल्टता और धारा के मध्य कालांतर को समझने के लिए किया जाता है। ये इस बात को दर्शाते हैं कि प्रत्यावर्ती परिपथ (AC सर्किट) में धारा, वोल्टता की तुलना में आगे चल रही है या पीछे ।
फेजर (Phasor)
यह एक सदिश होता है जो वामावर्त दिशा में नियत कोणीय वेग [प्रत्यावर्ती राशी(वोल्टता अथवा धारा) की कोणीय आवृत्ति ω ही फेजर का कोणीय वेग होता है] से घूर्णन करता है। फेजर की लम्बाई प्रत्यावर्ती वोल्टता अथवा प्रत्यावर्ती धारा के शिखर मान के बराबर होती है व प्रत्यावर्ती वोल्टता अथवा प्रत्यावर्ती धारा के तात्क्षणिक मानों को फेजर के एक घटक द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
जब फेजर वामावर्त दिशा में एक घूर्णन पूरा करता है, बिंदु A पर इसकी नोक 360° या 2π रेडियन कोण से घुमती है जो प्रत्यावर्ती राशि के एक पूर्ण चक्र को दर्शाती है। फेजर के घूर्णन का हर बिंदु प्रत्यावर्ती वोल्टता या धारा के किसी विशेष समय पर उसकी स्थिति को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, जब फेजर y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर दिशा) पर होता है, तो यह अधिकतम वोल्टेज या धारा को दर्शाता है (शिखर बिंदु) और जब यह x-अक्ष (क्षैतिज दिशा) पर होता है, तो यह शून्य वोल्टेज या धारा को दर्शाता है।
उदाहरण 1.
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में धारा का समीकरण एम्पियर है। तो निम्न की गणना कीजिये।
(i) वर्ग माध्य मूलमान मान (ii) शिखर मान (iii) आवृति (iv) प्रारम्भिक कला (v) t = 0 पर धारा का मान
हल :
(i)
(ii) शिखर मान (I0) = 4 एम्पियर
(iii) कोणीय आवृति (ω) = 100 π रेडियन/सेकंड
अब ω = 2πf, अतः आवृति (f) = (ω/2π) = 50 Hz
(iv) प्रारम्भिक कला = (π/3) रेडियन
(v) t = 0 पर धारा
उदाहरण 2.
यदि I = I0 sinωt तथा E = E0 cos [ωt + π/3] है तो E और I के मध्य कलान्तर ज्ञात कीजिये।
हल :
I = I0 sinωt
E = E0 cos [ωt + π/3] = E0 sin [π/2 + ωt + π/3] = E0 sin [ωt + 5π/6]
∴ कलान्तर = [ωt + 5π/6] – [ωt] = 5π/6
यदि E = 500 sin (100πt) वोल्ट हो तो धारा को शून्य से अधिकतम होने में लगा समय ज्ञात कीजिये।
हल :
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