एक शुद्ध प्रेरकत्व में औसत शक्ति
एक शुद्ध प्रेरकत्व में औसत शक्ति :- शुद्ध प्रेरक युक्त परिपथ की तात्क्षणिक शक्ति,
अब एक पूर्ण चक्र में (sin 2ωt) का मान शून्य होता है, अतः एक पूर्ण चक्र में परिपथ की औसत शक्ति :-
इस प्रकार एक पूर्ण चक्र में शुद्ध प्रेरक को आपूर्त (Supplied) औसत शक्ति शून्य होती है । वास्तव में एक प्रेरक चुम्बकन के समय स्त्रोत से जो ऊर्जा लेता है, वही ऊर्जा विचुम्बकन के समय स्त्रोत को पुनः प्रदान कर देता है।
एक प्रेरक का चुम्बकन व विचुम्बकन निम्न प्रकार समझा जा सकता है :-
इसी प्रकार निम्न आलेख में प्रत्यावर्ती वोल्टता E, प्रत्यावर्ती धारा I, चुम्बकीय फ्लक्स Φ व विद्युत शक्ति P के एक पूर्ण चक्र को दर्शाया गया है :-
- चित्र (a) में विद्युत धारा प्रेरक में बिंदु A से प्रवेश करती है व बिंदु B से निर्गत होती है। समय t = 0 से t = T/4 तक धारा और चुम्बकीय फ्लक्स का मान शून्य से अधिकतम मान तक बढ़ता है। इस समय प्रत्यावर्ती वोल्टता E और प्रत्यावर्ती धारा I, दोनों धनात्मक हैं इसलिए विद्युत शक्ति P का मान भी धनात्मक है। अतः प्रत्यावर्ती स्त्रोत से प्रेरक ऊर्जा ग्रहण करता है व प्रेरक की क्रोड़ चुम्बकित होती है।
- चित्र (b) में समय t = T/4 से t = T/2 के मध्य विद्युत धारा की दिशा समान है किन्तु धारा और चुम्बकीय फ्लक्स का मान अधिकतम मान से शून्य तक घटता है। इस समय प्रत्यावर्ती वोल्टता E ऋणात्मक और प्रत्यावर्ती धारा I का मान धनात्मक है इसलिए विद्युत शक्ति P का मान ऋणात्मक है। अतः प्रेरक प्रत्यावर्ती स्त्रोत को ऊर्जा प्रदान करता है व प्रेरक की क्रोड़ विचुम्बकित होती है।
- चित्र (c) में अर्ध चक्र के पश्चात अब विद्युत धारा प्रेरक में बिंदु B से प्रवेश करती है व बिंदु A से निर्गत होती है। समय t = T/2 से t = 3T/4 तक धारा और चुम्बकीय फ्लक्स का मान शून्य से अधिकतम मान तक विपरीत दिशा में बढ़ता है। क्यूंकि धारा की दिशा विपरीत हो चुकी है, अतः प्रेरक के सिरों की ध्रुवता भी विपरीत हो चुकी है। इस समय प्रत्यावर्ती वोल्टता E और प्रत्यावर्ती धारा I, दोनों ऋणात्मक हैं इसलिए विद्युत शक्ति P का मान धनात्मक है। अतः प्रत्यावर्ती स्त्रोत से प्रेरक ऊर्जा ग्रहण करता है व प्रेरक की क्रोड़ चुम्बकित होती है।
- चित्र (d) में समय t = 3T/4 से t = T के मध्य धारा और चुम्बकीय फ्लक्स का मान अधिकतम मान से शून्य तक घटता है। इस समय प्रत्यावर्ती वोल्टता E धनात्मक और प्रत्यावर्ती धारा I का मान ऋणात्मक है इसलिए विद्युत शक्ति P का मान ऋणात्मक है। अतः t = T/2 से t = 3T/4 के मध्य प्रत्यावर्ती स्त्रोत से ली गई ऊर्जा, प्रेरक द्वारा पुनः स्त्रोत को प्रदान कर दी जाती है और प्रेरक की क्रोड़ विचुम्बकित होती है।
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